सिंध पर अरबों का आक्रमण: अरबों के आक्रमण से पहले के सिंध क्षेत्र की जानकारी अली अहमद द्वारा फ़ारसी भाषा में लिखित पुस्तक चचनामा से मिलता है।
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अरबों का पश्चिमोत्तर भारत के सिंध क्षेत्र पर प्रथम सफल अभियान 712 ईसवी में मोहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में हुआ। मोहम्मद बिन कासिम ने राजा दाहिर को हराकर सिंध पर कब्ज़ा किया और इसके बाद मुल्तान को भी जीत लिया। मुल्तान में ही मोहम्मद बिन कासिम द्वारा सर्वप्रथम जज़िया कर लगाया गया।
इतिहासकार लेनपूल (Stanley Lane-Poole) ने अरबों की सिंध विजय को 'एक घटना ...एक परिणाम रहित विजय' (An incident........an Indecisive victory) कहा है।
भारत पर अरबों के आक्रमण का उद्देश्य
- साम्राज्य विस्तार एवं धन प्राप्ति
- इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार
अरबों द्वारा भारत पर किया गया पहला आक्रमण :
- अरबों द्वारा भारत पर प्रथम बार आक्रमण 711 ईसवी में किया गया था। यह पहला प्रयास था जब किसी इस्लामिक ताकत ने भारत के क्षेत्र को जीतने की कोशिश की।
- यह प्रयास ईरान के गवर्नर अल हज्जाज के आदेश पर उसके सेनापति उबेदुल्ला ने किया था।
- हज्जाज ने अपने सेनापति को विशाल सेना दिया हुआ था किन्तु सेनापति उबेदुल्ला का यह अभियान असफल रहा और वह युद्ध में मारा गया।
- इसके बाद हज्जाज ने अपने दामाद मोहम्मद-बिन-कासिम को अपना नया सेनापति नियुक्त किया और 712 ईसवी में उसे सिंध (भारत) पर आक्रमण करने हेतु भेजा।
- मोहम्मद बिन कासिम ने अपने कूटनीति का प्रयोग करके सिंध क्षेत्र में स्थित देवल के सूबेदार ज्ञानबुद्ध को देवल के राजगद्दी का लालच देकर उसे अपने पक्ष में कर लिया और देवल बन्दरगाह पर अपना अधिकार कर लिया जो कि वर्तमान में कराची बन्दरगाह के नाम से जाना जाता है।
- इसके बाद मकरान तट के रास्ते कासिम ने सिंध की तरफ अपने कदम बढ़ाएँ और 20 जून 712 ईसवी को रावर नामक स्थान पर चच के पुत्र राजा दाहिर को हराकर सिंध को जीत लिया और फिर मुल्तान पर भी कब्जा कर लिया यही पर उसने प्रथम बार जज़िया कर (गैर इस्लामिक कर) भी लगाया।
सिंध क्षेत्र (मकरान, मुल्तान, देवल और रावर) |
- इस प्रकार मोहम्मद बिन कासिम द्वारा 712 ईसवी में सिंध पर किया गया आक्रमण, अरबों द्वारा भारत पर प्रथम सफल आक्रमण रहा।
- सिंध विजय के बाद अरबों ने 731 ईसवी में सिंधु नदी के किनारे पहला नगर 'महफ़ूजा' स्थापित किया इसके उपरांत दूसरा नगर 'मंसूरा' स्थापित किया था।
तुर्को का आक्रमण :
- अरबों के बाद भारत पर तुर्कों ने भी आक्रमण किया।
- भारत पर पहली बार आक्रमण करने वाला तुर्क शासक सुबुक्तगीन था।
- सुबुक्तगीन, यमिनी वंश (जिसे गजनी वंश के नाम से भी जाना जाता है) के संस्थापक अलप्तगीन का दास एवं दामाद था।
- अलप्तगीन ने अमीर अबू बक्र लाविक से जाबूलिस्तान तथा उसकी राजधानी गज़नी को छिन लिया था, उसी समय से गज़नी, यमीनी शासकों की राजधानी बन गई।
- सुबुक्तगीन, अलप्तगीन के बाद अगला तुर्क शासक बना था।
- सुबुक्तगीन के बाद उसका पुत्र महमूद गजनवी तुर्क का अगला शासक बना।
महमूद गजनवी
- महमूद गजनवी ने 1001 ईसवी से 1027 ईसवी के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण किया।
- इन सभी आक्रमणों का उद्देश्य भारत में लूट-पाट कर धन संग्रह करना था।
- तुर्की शासक महमूद गजनवी ने 1001 ईसवी में भारत पर पहली बार आक्रमण पंजाब के हिंदुशाही शासक जयपाल के विरुद्ध किया और राजा जयपाल इस युद्ध में हार गए।
- महमूद गजनवी का दूसरा आक्रमण मुल्तान पर हुआ। मुल्तान का राजा फतेह दाऊद था।
- 1014 ई॰ में मुल्तान आक्रमण के पश्चात गजनवी ने थानेश्वर के चक्रस्वामी मंदिर में लूट-पाट किया और उनके मूर्ति को भी खण्डित कर दिया।
- 1015 से 1021 ई॰ के बीच गजनवी ने दो बार कश्मीर जीतने का प्रयत्न किया किन्तु उसके सभी प्रयास असफल रहे।
- 1018 ईसवी में उसने गंगा की घाटी में प्रवेश किया और मथुरा के कृष्ण मंदिर को जी भर के लूटा तथा मंदिरों को खण्डित किया। मथुरा के पश्चात गजनवी ने कन्नौज प्रस्थान किया जहां से उसे अतुल संपत्ति की प्राप्ति हुई।
- महमूद गजनवी का छठा आक्रमण हिंदुशाही राजा आनन्दपाल के विरुद्ध था। आनन्दपाल ने गजनवी के विरुद्ध हिन्दू राजाओं का एक संघ बनाया था जिसमे अजमेर, दिल्ली, उज्जैन, ग्वालियर, कन्नौज और कालिंजर के राजा शामिल थे।
- 1025 ईसवी में गजनवी ने जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था तब उस समय गुजरात पर सोलंकी वंश के भीम प्रथम का शासन था।
- महमूद गजनवी का भारत पर अंतिम आक्रमण 1027 ईसवी में जाटों के विरुद्ध था।
- जिस समय महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर को लूटकर वापस जा रहा था, रास्ते में उसे जाटों ने परेशान किया था। जाटों से बदला लेने के उद्देश्य से गजनवी ने अंतिम बार 1027 ईसवी में भारत पर आक्रमण किया।
- 'शाहनामा' के लेखक फिरदौसी, अलबरूनी, उत्बी आदि महमूद गजनवी के दरबारी विद्वान व लेखक थे।
अलबरूनी
- जब महमूद गजनवी ने भारत पर चढ़ाई की थी तभी उसके साथ फारसी विद्वान, विचारक और लेखक अलबरूनी भी भारत आया। अलबरूनी की रचनाएँ अरबी भाषा में है।
- अलबरूनी की सबसे महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय रचना किताब-उल-हिन्द है, जिसमे अलबरूनी ने भारत के संदर्भ में अनेक जीवंत जानकारीयां दी है।
- 'किताब-उल-हिन्द' के माध्यम से उस समय के भारत के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पक्षों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
- 'किताब-उल-हिन्द' में अलबरूनी ने भारतीय परम्पराओं, रीति-रिवाजों, त्यौहारों, उत्सवों, धार्मिक अनुष्ठानों, दैनिक यज्ञ, पुजा-पाठ, तीर्थयात्रा और व्रत आदि का भी वर्णन किया है।
- अलबरूनी का जन्म 973 ईसवी में ख्वारिज़्म (उज्बेकिस्तान) में हुआ था। अलबरूनी अरबी के अलावा सीरियाई और यूनानी भाषा का भी ज्ञान रखते थे।